हिन्दी उर्दू साँझे
बोल
लेखिका--अनुभूति काबरा राठी

“हिन्दी उर्दू साँझे बोल” कविता पाठ का एक ऐसा कार्यक्रम है जिसका इंतज़ार अटलांटा
के कवियों और कवयित्रियों, शायर और शायराओं को उत्सुकतापूर्वक रहता है। इस
कार्यक्रम में वे सभी रचनाकार भाग ले सकते हैं जो हिन्दी या उर्दू में स्वरचित रचना
का पाठ करना चाहते हैं।
श्रीमती “मंजु तिवारी” और श्रीमती “सन्ध्या सक्सेना भगत” ने ‘हिन्दी उर्दू साँझे
बोल’ की शुरुआत सन् 2007 में की थी। श्रीमती भगत और श्रीमती तिवारी हिन्दी की जानी
मानी हस्तियों में से हैं। श्रीमती मंजू तिवारी एमरी यूनिवर्सिटी की भूतपूर्व
हिन्दी प्रोफ़ेसर रह चुकी हैं और वर्तमान में बालविहार हिंदी स्कूल VHPA की संचालिका
हैं। श्रीमती संध्या भगत अटलांटा के हिन्दी रंगमंच ग्रुप ‘धूप छाँव’ संस्थापिका
हैं।
हिन्दी उर्दू साँझे बोल का यह ग्यारहवाँ साल था। इतने सालों से विभिन्न कवियों को
इस मंच पर एकत्रित करना कोई आसान कार्य नहीं है लेकिन भाषा के प्रति उनकी लगन के
कारण ही यह संभव हो पाया है। यह हिंदी-उर्दू भाषाओं में लिखने वाले कवियों के लिए
एक मंच है जो किसी देश की सीमा से बँधा नहीं है | इस बार यह कार्यक्रम २४ फ़रवरी,
२०१६ की शाम को नॉरक्रॉस में आयोजित किया गया। जिन कवियों/शायरों, शायराओं/कवियत्रियों,
ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया वे हैं – राकेशमणि त्रिपाठी, सीमा गर्ग, शिल्पा
अग्रवाल, ताहिर सयाल, कमलेश चुग, बृजरानी वर्मा, अनुभूति राठी, प्रीति गुप्ता, ओम
अरोरा, चंदर गंभीर, मधुर गुप्ता, अशफाक़ फ़रूखी, मकसूद खत्री और सदफ़ फ़रूखी |

कार्यक्रम की शुरुआत पुलवामा में शहीद हुए सैनिकों की श्रद्धाँजली से हुई। उनकी
स्मृति में एक मिनट का मौन रखा गया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि कॉन्सुलावास के थे श्री “शैलेश लखटकिया जी” जिन्होंने
दो शब्द कहे और कार्यक्रम के संस्थापकों की भाषा की प्रगति में योगदान देने पर
भूरि-भूरि प्रशंसा की। फिर उन्होंने मंच रचनाकारों के लिए खोल दिया।

इस वर्ष कविता पाठ का विषय था हास्य या मज़ाहिया। चूँकि सभी कवि इस रस में नहीं
लिखते, इसलिए उन्हें किसी और रस की कविता सुनाने की भी छूट थी। फिर भी, सभी रचनाकारों
ने कुछ न कुछ इस विधा में सुनाने का प्रयत्न किया और सफल भी रहे। अपनी रचनाओं से
उन्होंने श्रोताओं को गुदगुदाया। रचनाओं के विषय भी काफ़ी मनोरंजक थे। फ़ेसबुक से
लेकर मक्खी मच्छर की शादी और कॉस्टको की शॉपिंग से लेकर राजनीति, इन सभी को
कवयित्रियों और कवियों ने कविता में पिरोया। हास्य के अलावा जीवन दर्शन और देश भक्ति
की कविताएँ भी सुनाई गईं। कार्यक्रम लगभग डेढ़ घंटे तक चला। सभागार लगभग पूरा भरा
था १०० से अधिक लोगों ने इस कार्यक्रम का आनंद लिया।

कार्यक्रम का समापन संचालिकाओं ने सभी वॉलंटियर्स को धन्यवाद प्रेषित करते हुए किया।
कोई भी कार्यक्रम कई लोगों के सहयोग के बिना पूर्ण नहीं हो पाता। मंजूषा वर्मा,
पुनीत भटनागर, रचना गुप्ता, आशा गुप्ता, सरफ़राज़ खान, पवनदीप सिंह व सागर पुजारी आदि,
सभी का आभार | आभार की इस कड़ी में विशेष उल्लेख श्री अनिल भगत एवं श्री श्याम
तिवारी का है जो अपनी पत्नियों का दृढ़तापूर्वक हर कार्यक्रम में साथ देते हैं।

आयोजकों ने डॉक्टर नाज़नीन व शमीम दलवाई को धन्यवाद दिया जो हर साल इस कार्यक्रम के
लिये अपना स्थान इवेंट हॉल देते हैं | इस बार सब्ज़ीवाला व्यवसाए वालों ने आंशिक रूप
से भोजन में सहायता दी है | कविता पाठ के बाद स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था भी आयोजकों
ने रखी थी। भोजन के साथ कविताओं पर चर्चा करते करते और अगले वर्ष फिर मिलने का वादा
करके यह शाम समाप्त हुई।


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Mar-13-2019